Posted March 24 by Arun Sharma
सभी को लगे खूब प्यारा समन्दर, सुहाना ये नमकीन खारा समन्दर, नसीबा के चलते गई डूब कश्ती, मगर दोष पाये बेचारा समन्दर, दिनों रात लहरों से करता लड़ाई, थका ना रुका ना ही हारा समन्दर, कई राज गहरे छुपाकर रखे है, नहीं खोलता है पिटारा समन्दर, ...
Posted March 24 by Arun Sharma
दिलों की कहानी बनाने की जिद में, लुटा दिल मेरा प्यार पाने की जिद में, बिना जिसके जीना मुनासिब नहीं था, उसे खो दिया आजमाने की जिद में, मिली कब ख़ुशी दुश्मनी में किसी को, ख़तम हो गया सब निभाने की जिद में, घुटन बेबसी लौट घर फिर से आई, रहा कुछ नहीं सब...
Posted March 24 by Arun Sharma
1. मेरी कीमत लगाता बजारों में था. वो जो मेरे लिए इक हजारों में था. कब्र की मुझको दो गज जमीं ना मिली, आशियाँ उसका देखो सितारों में था. 2. लाखों उपाय दिलको मनाने में लग गए, तुमको कई जनम भुलाने में लग गए, निकले थे घर से हम ...
Posted March 24 by Arun Sharma
भारत की सरकार में , शकुनी जैसे लोग,आम आदमी के लिए , नित्य परोसें रोग नित्य परोसें रोग , नहीं मिलता छुटकारा,ढूँढे कौन उपाय , हुआ मानव बेचारा महिलायें हर रोज , अपना मान हैं हारत, बदले रीति रिवाज, बदलता जाए भारत...
Posted March 24 by Arun Sharma
'बहरे मुजारे मुसमन अख़रब' (221-2122-221-2122) दिन रात मुश्किलों का अब साथ काफिला है 'ये कैदे बामशक्कत जो तूने की अता है ' आराम ना मयस्सर कुछ वक़्त का किसी को, कोई तमाम लम्हें फुर्सत से फांकता है, इंसान ये वही है जो मैंने था बनाया, ताज्जुब भरी नज़र से भगवान ताकता है, रस्मो रिवाज बदले बदली नज़र...
Posted March 24 by Arun Sharma
गैरियत आज जालिम ज़माने में है, मौत सबकी समय के निशाने में है, हर दरिंदा यहाँ अब यही सोचता, सुख मज़ा नारियों को सताने में है, सुर्ख़ियों में वो छाये गलत काम कर, नाम अच्छों का गुम अब घराने में है, कब ठहरती वफ़ा है अधिक देर तक, बेवफाई का मौसम फ़साने में है, बेंच कर वो शरम आगे जाता रहा, मेरी मंजिल गुमी ह...
Posted March 24 by Arun Sharma
ना देखा आपने, चाहत अथाह है, मुखड़ा आपका, रखती निगाह है, मैं पूजूं आपको, दिल की सलाह है, मेरी तो आपमें, मंजिल है राह है, रजा में आपकी, सब कुछ पनाह है, सिर्फ ये दिल नहीं, जान भी तबाह है.
Posted March 24 by Arun Sharma
'बहरे मुजारे मुसमन अख़रब' (221-2122-221-2122) दिन रात मुश्किलों से जीवन का वास्ता है,साँसों के साथ चलता मरने का सिलसिला है,महका गुलों से उपवन मौसम हुआ सुहाना,नींदों के बिना भौंरा अब रात काटता है, फूलों को मेरे सबने रौंदा बुरी तरह से, मेरे चमन से उसके गुलशन का रास्ता है,मुरझाये पेड़ पौधे सूख...
Posted March 24 by Arun Sharma
ग़ज़ल१२२२, १२२२, १२२२, १२२२,बह्र : हजज मुसम्मन सालिमकभी सच्ची मुहब्बत को दिवाने दिल नहीं पाते,यहाँ पत्थर बहुत रोया वहां आंसू नहीं आते, रजा मेरी जुदा ठहरी रजा उसकी जुदा ठहरी, मुझे कलियाँ नहीं जँचती उसे कांटे नहीं भाते,डरा सहमा रहेगा उम्रभर ये दिल मेरा यूँ ही,तेरी फितरत से वाकिफ जबतलक हम हो नहीं जाते...
Posted March 24 by Arun Sharma
काटों भरी डगर है जीवन का पथ खुदा है, गंभीर ये समस्या हल आज लापता है, अंधा समाज बैरी इंसान खुद खुदी का, अनपढ़ से भी है पिछड़ा, वो जो पढ़ा लिखा है, धोखाधड़ी में अक्सर मसरूफ लोग देखे, ईमान डगमगाया इन्सां लुटा पिटा है, तकदीर के भरोसे लाखों गरीब बैठे, हिम्मत सदैव हारें इनकी यही खता है, अपमान नारि...
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